पुलवामा शहीदों के लिए पटाखे और न्यूज़ीलैंड में हुये आतंकी हमले के लिए मोमबत्ती ये कैसी देशभक्ति है हिंदुस्तान के मुसलमानों की

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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कट्टरपंथियों का चेहरा एक बार फिर देश के सामने आ गया है जो लोग आतंकवाद का धर्म नहीं होता कहते घूमते थे उनके मुंह पर एक करारा तमाचा है।

14 फरवरी 2019 को पुलवामा में एक मुस्लिम आतंकवादी द्वारा हमारे 44 जवानो को मौत के घाट उतार दिया गया था तब ये एएमयू वाले दोगले जश्न माना रहे थे लेकिन आज हजारों किलोमीटर दूर न्यूज़ीलैंड में गोलीबारी हुई तो ये मोमबत्तियाँ लेकर निकल आए हैं ।

एयरस्ट्राइक कर पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब देने वाले मोदी और हमारी सेना को खुलेआम गरियाने वाले ये कट्टरपंथी मुल्ले आज शांति का पाठ पढ़ा रहे हैं । पुलवामा में हुये हमले का जश्न सिर्फ इसलिए मनाया जा रहा था क्योंकि एक मुल्ले ने आतंकवादी हमला किया था और न्यूज़ीलैंड में हुये हमले में इनके भाईजान मारे तो इन्हे शांति और संवेदना की जरूरत पड़ गयी ।

यही तो है इनका दोगलापन , आज मोदी विरोध में ये देशद्रोही हो गए हैं मोदी विरोध करते करते ये देश विरोधी एजेंडा चला रहे हैं,  चाइना ने मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित नहीं होने दिया तो दिल्ली के कांग्रेसी पटाखे फोड़ रहे हैं,  चन्द्रशेखर रावण कांग्रेस की शह पाकर कहता है भीमा कोरेगांव दोहराने में देर नहीं लगेगी , ये मोदी विरोध नहीं साहब देशविरोध है जिसे हिंदुस्तान की जनता बखूबी समझती है

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